Pages

Stay Cool

If "Plan A" Didn't Work. The alphabet has 25 more letters ! Stay Cool. It's gonna be awesome.

फैसला

Friday, 3 October 2014



आज  है  फैसले  की  घड़ी
चुहिया  पूँछ  दबाये  है  खड़ी
धक – धक  दिल  तो  करता  है
कहने  से  कुछ  डरता  है …

युद्ध  रहा  कुछ  बिलों  को  लेकर
भूरी, सफ़ेद  चुहियों  के  भीतर
हौसला  बढ़ने  आये  तीतर
भले  लोग  बैठे  हैं  घर  पर …

समझदार  की  कौन  है  सुनता ?
असरदार  का  झंडा  उड़ता
कोर्ट-कचेहरी  के  चक्कर  में
पूँछ हिलता  चूहा  मरता …

चार  बिलों  पर  आठ  का  कब्ज़ा 
मिया  बाबू  बना  गए  नक्शा
चार  चुहियों  ने  दिया  था  हफ्ता
भूरी  चुहियों  का  घर  है  बस्ता …

हमला  करा  श्वेत  चुहियों  ने
दो चूहों  और  छ: चुहियों ने
छीनी सर  से  छत   वो  प्यारी
फेंकी  सारी  चीज़ें  न्यारी …

भूरी  चुहियों  ने  दिमाग  चलाया
एक  भूरा  वकील  उठाया
काला  कोट  वो  पहन  के  आया
आँखों   पर  चश्मा  भी  चढ़ाया …

टक-टक देखा  सबकी  ओर
कहा  कटी  नहीं  अपनी  डोर
हिम्मत  करो, ओ !  जागो  यारों
न्याय  चाहिए ? भागो  सारों …

तबसे  लटका  भाग्य  हमारा
कानून  की  देवी  के  हाथ  में  सारा
आँख  पे  पट्टा,  हाथ  में  तराजू
नसीब  नहीं  खाने  को  काजू …

न्यायालय  में  केस  है  अटका
जैसे  पूँछ से  चूहा  लटका
दिखे  कहीं  ‘गर  आठ  ये  सारे
कर  देंगे  हम  वारे – न्यारे …

फैसला  तो  आता  ही  होगा
फिर  सबको  भिड़ना  भी  होगा
चलो  चलें  अब  हम  भी  अंदर
देख  लें  चल  के  जादू – मंतर …

No comments:

Post a Comment

Nice to meet you...