सजी हुई फूलों से
चौकी,
पीतल के दीये की
आरती
मोदक की मीठी सी
ख़ुशबू,
“बप्पा मोरिया” - गूंज उठाती
माटी की इस मूरत
में ही,
सारा संसार सिमट आया
घर का हर एक
कोना जैसे,
इस पावन रूप से
हर्षाया।
जीवन के संकट को
हरने,
विघ्नहर्ता आते हैं,
मोहित सी झलक, माथे पर तिलक
रिद्धि-सिद्धि लाते हैं।
विसर्जन का जब दिन
आए,
आँखें नम, मन शांत
होगा,
विनायक पर विश्वास रखकर,
नया सफ़र आसान होगा।

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